Saturday, May 31, 2014

छत्रसाल जयंती 31 मई पर विशेष : महराजा छत्रसाल जी का अध्यात्मिक अनुशीलन

छत्रसाल जयंती 31 मई पर विशेष : महराजा छत्रसाल जी का अध्यात्मिक अनुशीलन

छत्रसाल अपने समय से प्रखर राज नेता, प्रचण्ड यौद्धा, प्रगटमान साहित्यकार, महान संगठक एवं भक्त थे। वे समस्त मानवता के अग्रणी निर्माता तथा संयुक्त हिन्दू चेतना के अंशुमाली थे। इतिहास में बहुअयामी विधाओं से ओतप्रोत दूसरा कोई नाम ढूढे नही मिलता। केवल पंजाब में एक सम्मानीय एवं अग्रणी नाम गुरू गोविन्द सिंह जी का है। हिन्दू-पातशाही के प्रथम सम्राट महराज शिवाजी से छत्रसाल जी की मुलाकात उस हुई जब वे वीर भूमि बुन्देलखण्ड को संगठित करने में लगे हुए थे। उसी समय उनके मन में किसी समर्थ गुरू की आंकाक्षा प्रबल हो उठी थी। छत्रसाल में बचपन से ही होनहार वीरवान के होतचिकनेपात की तरह गुणों के अंकुर प्रस्फुटित होने लगे थे यही कारण था कि बाल्य अवस्था में ही माॅं विन्ध्यवासिनी मंदिर को ध्वस्त करने आ रहे मुगल सैनिकों को अकेले ही धूल चटा दी थी। पूरे जीवन काल में छत्रसाल ने कभी पराजय का मुंह नही देखा। शेरअफगन, मिट्ठू पीरजादा, पुरदल खान, रोहिल्ला, मोहम्मद बंगस आदि छत्रसाल की प्रलयंकारी तलवार के वार नही झेल पाए और पराजित होकर भाग गए। ओरछा, दतिया, कोंच, कालपी, कलिंजर के अभियान में अनेक राजाओं को प्रेम क्रपाण से राष्ट्र की महान विराट धारा में जोडने का कार्य किया। इनता ही नही जेसलमेर की राजकुमारी की आर्त गुहार सुनकर उसकी रक्षा की तथा ओरंग की कलंकित क्रूर कालिमा को ध्वस्त कर दिया। 

साहित्य के क्षेत्र में छत्रसाल की रचनाओं में धर्मनीति, राजनीति, कुलरीत का सटीक मार्गदर्शन मिलता है। वही दूसरी ओर रामकृष्ण, हनुमान पर उनकी भक्ति रचनाएं भी कम नही हैं। जब युद्ध के नगाडे बजते थे तो वीर बजरंगबली अंकित परचम पवनपुत्र की तरह लहराने लगता था। रैयत सब राजी रहे उनके राज्य का लक्ष्य था। सेना तथा सतर्क रहे, सीमा पर निरंतर चैकसी का सिद्ध सिद्धांत रहा है। इसलिए उनके राज्य में प्रत्येक युवक प्रशिक्षित एवं निष्ठावान था। सैनिक पत्नी का कथन - 

घर घोडा पिया सूरमा मेढे पै को वास। नित उठ होत लराईया का चुडियान की आस।  

छत्रसाल के राज्य में प्रत्येक युवती को अपने पति के सूरमा होने में गौरव का अनुभव होता था वे बडे हर्ष के साथ पति को युद्ध पर जाने के पूर्व उनका वीरोचित श्रृंगार कर अक्षत कुमकुम का तिलक लगाकर बिदा करती और कहती - 

पीया तुम्हारी राह में सब कंटक हो फूल। पीठ तनक न दिखाईयो शत्रु करो निर्मूल ।।

छत्रसाल का समाज कुंठाओं का समाज नही था वे महामति श्री प्राणनाथ जी के अंगभूत थे। अंततः ब्रम्हविद् राष्ट्र, चिंतन, समाज उन्नयन, छत्रसाल जी के विराट समाज के मूल खंभ थे। उनके सामाजिक परिवेश में प्रेम, सदभाव, सहयोग, एक आत्मीयता प्रबल भाव था। 

इतिहासी अनुभव, बुद्धि विवेक के बेहरो एवं गप्पी गुरूओं की दुर्गधों ने छत्रसाल की प्रचण्डता को बोना करने का असफल प्रयत्न किया है। इसमें उनका हांथ ज्यादा प्रतीत होता है जो महाबली छत्रसाल जी के हांथों से पराजित होते रहें है। छत्रसाल जी का अनुशीलन इतना प्रखर एवं प्रकाशमान है कि उनके सामने सभी विधाएं नतमस्तक हैं। उनका अध्यात्मिक चिंतन उस समय से शुरू होता है जब वे लगभग 22 वर्ष के थे। उसी समय उनके जीवन में एक अनोखी घटना घटी भादों की अमास्या की काली रात थी मूसलाधार पानी बरस रहा था। दामिनी कडक रही थी छत्रसाल जी गहरी नींद सो रहे थे। एकाएक उनके कक्ष में प्रकाश फैल गया एक शुभ्र भेशधारी निर्मल छवि सामने प्रकट हुई। जाग उठे छत्रसाल भय का लेश नही। 

निर्मल छवि में हलचल हुई। मैं तुम्हे दूसरी बार मिल रहा हॅू इसके पूर्व जंगल में मिला था। तुम्हें पूरे भारत का सम्राट बनाने की रोटी खिलाना चाहता था। तुमने चैथायी ही खायी आज एक सिक्का दे रहा हॅू बारह वर्ष बाद फिर मिलूंगा, तुम्हारा ही होकर रहूंगा, छवि अदृश्य हो गई, सिक्का हांथ में रह गया। छत्रसाल को बचपन की जंगल की घटना की याद ताजा हो गई। सिक्के पर बनी छवि को चूमा और गले में धारण कर लिया। इसी दिन से छत्रसाल के मन में एक परम सत्य को खोजने की अभिलाषा उद्गद हो गई। गरजती तोपे, हिन हिनाते घोडे, चिघाडते हांथी, चमचमाती तलवारे छत्रसाल की सत्य की खोज की भावनाओं को दृढ करती रही। इसी प्रकार 12 वर्ष बीत गए और एक छतरपुर जिले के मऊसहानिया धुबेला ग्राम के पास तिदुनी द्वार पर एक महात्मा के दर्शन हुए। महात्मा बोले छत्रसाल अब तुम मेरे वश में हो कही नही जा सकते। छत्रसाल को किसी का बंधन स्वीकार नही करता और बोले की मुझे मेरे पास 12 वर्ष पूर्व से उपलब्ध सिक्के की छवि वाला पुरूष ही अपने वश में कर सकता है। महात्मा जी ने अपनी झोली से निकालकर उस छवि वाले हजारों सिक्के के दर्शन करा दिए जो भांदो की रात को छत्रसाल को दृश्यमान हुए थे। छत्रसाल का उमंग का परावार नही रहा राज महल आकर बोले आज परमात्मा मेरे द्वार पर आए हैं भाग्यशाली दर्शन कर लें। छत्रसाल ने महराज दत्तात्रय की परम्परा का निर्वहन करते हुए उन महात्मा जी से दीक्षा ग्रहण कर ली। हालाकि अनेकों क्षेत्र में उनके गुरू थे। शस्त्रों के अनुसार 6 गुरू होते हैं। छत्रसाल ने अपने अंतिम गुरू को सर्वस्व समर्पण कर दिया और बोलेः- 

छत्रसाल ने बांधा, निजनाम शरण को आया। तीनों एक संगसाधुन को, जिनको धाम में वासा ।।

इसी दिन से छत्रसाल ने सत्ता का उदभव प्रारंभ हो गया। इसी उम्र में आचार्य शंकर, स्वामी विवेकानन्द, महात्मा बुद्ध, तीर्थाकर महावीर और सदगुरू श्री देवचन्द्र जी को भी परम सत्य का बौध प्राप्त हुआ था। जिस धाम का वासा छत्रसाल ने अपने पद में किया है वह बैकुंठ नही, साकेत नही, गोलोक नही, शून्य निरंजन नही है। वह गीता का परमधाम है। न तद्भाष्यते सूर्यो श्षशांको न पावकः। यद्गत्वा न निर्वतन्ते तद्धाम धाम परमं मम ।। 

इसी परम धाम को प्राप्त करने का प्रयास ही हिन्दू धर्म एवं संस्कृत का परस्कृत स्वरूप है। यही परम मोक्ष है। छत्रसाल जी इस रस में ऐसे डूबे की उसी की प्रेमल तरंग बन गए। उस धराधाम की स्वयं एक विभूति सिद्ध हुए। उनमें सकुंडला शक्ति का प्रगटन हो गया। वे वेदों के श्षास्वतीशमः बन गए। जिनके लिए हरिवंश पुराण के भविष्य खण्ड अध्याय चार में यह उल्लेख है कि:- 

अभाविनो भविष्यन्ति मुनियो ब्रम्ह रूपिणः। उत्पन्ना ए कलियुगे प्रधान पुरूषान्ययः ।। 

छत्रसाल ही वे ब्रम्ह ऋषि हैं जिनके आगमन का उल्लेख वेदव्यास जी ने 5 हजार वर्ष पूर्व किया। गुरू साक्षात् परंब्रम्हा तस्मै श्रीगुरूवे नमः ऐसे प्रधान पुरूष के आश्रय में वे श्री कृष्ण के साथ बृज ने योग माया मण्डली रास ने एवं जागृति ज्ञान की लीला भूमि कलियुग में कोणांक के सूर्य मंदिर की 12 हजार रश्मियों की तरह प्रकाशमान हुए है। अपनी अध्यात्मिक रचनाओं में वे प्रश्न करते हैं क्यों ब्रम्हाण यहां ऊपजो, कैसे 14 लोक। कैसे माया विस्तारी। कैसे दुख, सुख शोक। 
उन्होंने परमधाम वरण करने के पूर्व विनय करते हुए कहा - 

श्री धाम धनी विनी करो तोसो। केवल बुद्धि कृपा कर मोसो। 
करो कृपा राज कृपा निधान। वरनो सुधा भवन शुभस्थान।। 

जो परमात्मा को याद नही करते उनके लिए वे कहते हैं - 

धाम धनी सुमरे नही करके मन विश्वास। ते मर मर ऐसे गए ज्यो पटपर की घास।। 

उन्होंने पूरण ब्रम्ह ब्रम्ह से न्यारे पद में उन्होंने अपने आराध्य की पहचान कराई। बायी आंख मेरी बेर बेर फरके मैं पति वृत सखी भाव भक्ति का प्रदर्शन करते हैं। 

कराल कलयुग की करालता का विध्वंस करने के लिए वे कहते हैं - 

लेनी देवचन्द्र की वाणी, तारम तम की तरना। श्री जी साहेब के राख चरन उर, अधन वचन को है हरना।। छत्रसाल कलीकालय मारो। धाम धनी सो कव मिलना।।  कृष्ण की लीला पर उन्होंने कहा कि - रस सो लीजे मरद दीजे ग्वालन दही खवायो। बडे प्रीत रस रीत परस्पर, सखी साकुण्डल गओ।। 

शस्त्रों की भविष्यवाणियों को पुष्ट करते हुए छत्रसाल परना (पन्ना) का परमधाम से संबंध जोडते हैं - 

ते ब्रज में होय होय रासमें, इत कीनो घरवेष। ते भरत खण्ड मध्य देष, परना नगर सुभदेष।।
ते जित नित जुगल विराजत, प्राणनाथ निजनाम। ते दरसन पाए वचनसों, पावत पूरन घाम ।। 

छत्रसाल अपने एक अन्य पंचम सम्बोधित पद में उनको लताडते है जो अपने को ही सबसे बडा मानकर दूसरों की गिला करते हैं - 

जो जागे भागे जग धाते, तेई परम सभागे। पंचम इश्क निशंक जिनके गिल्ला करे अभागे।।

छत्रसाल जी का अध्यात्मिक ज्ञान इतना प्रखर है कि कोई शास्त्र और शस्त्र के वे महावली थे। उनकी अध्यात्मिक विधाओं पर निरंतर शोध की आवश्यकता है। छत्रसाल के समय हिन्दू धर्म एवं संस्कृति पर निरंतर घात प्रतिघात होते रहते थे। अतः धर्म रक्षा उनका प्रधान दायित्व था। महामति प्राणनाथ दिग्विजय करते हुए धर्म गुरू के रूप में पन्ना आते हैं। उन्हें उदयपुर, खडकारी, आमेर, बुंदी, जेसलमेर, रामपुर आदि के राजाओं को हिन्दू धर्म रक्षा के लिए उठ खडे होने का आव्हान किया था। उन्होंने राजाओं, मठधीशों, महंतों को कर्णावती, हरिद्वार, काशी, मथुरा, आवंतीका के मंदिर के ध्वंश का ध्यान दिलाते हुए एक साथ खडे होकर मदांध तत्कालीन सत्ता से युद्ध करने का आव्हान किया था। कहा था कि तीनों लोकों में भारत श्रेष्ठ है भारत में हिन्दू धर्म श्रेष्ठ है इसकी रक्षा, प्रतिष्ठा तुम्हारा मुख्य दायित्व है किन्तु केवल छत्रसाल ही आगे आए। कीरंतन नामक ग्रंथ में महामति श्री प्राणनाथ इस बात का उल्लेख करते हुए कहते है - 

बात सुनी रे बुन्देरे छत्रसाल ने आगे आए खडा लेकर तलवार।
सेवा लई सारी सिर खैच के साइंये किया सेनापति सरदार।। 

छत्रसाल की इस देश धर्म की सेवा के सफर में महामति ने समृद्धि हीरा, वीरता, अजयता, महाराजाधिराज का वरदान प्रदान किया। आज भी दशहरे के दिन उस सेवा और शौय का प्रतीत पान का बीरा और तलवार का प्रदान स्वरूप खेजडा मंदिर में प्रतिवर्ष आयोजित होता है। छत्रसाल विशाल सेना के साथ महामति प्राणनाथ जी के नेतृत्व में बुन्देलखण्ड की एकता का सबल राज्य स्थापित किया जो धर्म राज्य निरूपित हुआ। 

छत्रसाल ने सेवा और साधना के 36 विभागों को सुचारू रूप से संचालित करने के व्यापक प्रबंधन किए। उन विभागों में जीवन के सभी वस्तुओं का निर्माण स्वश्रम से किया जाता रहा है। स्वःश्रम कार्य से निर्मित पन्ना नगर का श्री प्राणनाथ मंदिर आज भी अपनी भव्यता और दिव्यता के लिए विश्वविख्यात है। छत्रसाल ने धर्म प्रचार का कार्य के दौरान बरगढ, दतिया, काशी के अनेक विद्वानों को तारतम्य की दीक्षा दी। उन्होंने सम्राट अशोक की तरह परिष्कृत हिन्दू प्रणामी धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए नेपाल, गुजरात, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र आदि में धर्म गुरूओं को भेजा। छत्रसाल की सुनियोजित इस योजना में सम्पूर्ण भारत, नेपाल, भूटान, मारीशस, अमेरिका, कनाडा, इग्लेण्ड, साउथ अफ्रीका के प्रणामी मंदिरों प्रतिष्ठानों मं एक करोड लोग कम से कम दो बार महामति प्राणनाथा के साथ महाराजा छात्रसाल की जय बोलते है । 
छत्रसाल एक राजा ही नहीं योद्धा, साहित्यकार, भक्त प्रशासक व स्वयं परमात्मा के अंगभूत है । वे अक्षरब्रम्ह परमात्मा के उद्गाता एवं अक्षरातपरत पर पराधाम के दिव्य कहा है। आईए छत्रसाल की जय बोलते हुए हिन्दुस्तान की एकता के लिए हिन्दुत्व की गौरवयमी एकता को दृढता ऐ दृझ करे । और अपने आत्म कल्याण के लिए छत्रसाल की यह बात धयन में रखे ।

बेटा काम न आवही धन नही आवे काम।
छत्रसाल गोसे गहो धाम धनी को नाम ।।

Thursday, May 29, 2014

बलात्कार और हमारा मीडिया


बलात्कार और हमारा मीडिया
एक टीवी चैनल खुद को सबसे तेज होने की घोषणा करता है. दूसरा चैनल कहता है- जिससे कोई खबर छूटती नहीं. इससे भी बढ़कर अन्य चैनल की घोषणा है- हम खबरों की मर्म को समझते हैं. लेकिन दिन-रात मोदी का गुणगान गाने वाले चैनलों को 4 लड़कियों के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की खबर में कोई मर्म नजर नहीं आता, जबकि सामूहिक बलात्कार की शिकार चार लड़कियों में 2 नाबालिग हैं.
बलात्कार जघन्य अपराध है. सामूहिक बलात्कार उससे भी जघन्य अपराध है. नाबालिग लड़की से बलात्कार और भी अधिक जघन्य अपराध है, लेकिन हमारे इलैक्ट्रानिक मीडिया को देखिए कि वह इसे खबर ही नहीं मानता. न ही खबर में मर्म नज़र आता है.
हिसार जिले(हरियाणा) के भगाणा गांव में बलात्कार की शिकार चार लड़कियां अपने परिवार, रिश्तेदारों के साथ जंतर-मंतर, दिल्ली में धरने पर बैठी हैं. दिल्ली देश की राजधानी है. दिल्ली में निर्भया के साथ बलात्कार हुआ था, पूरे देश ने उसकी आवाज सुनी थी. उनके साथ हुए अन्याय पर भी देश, मीडिया ध्यान देगा, और पूरे देश से न सही, दिल्ली के कोने-कोने से लोग जुटेंगे और पीडि़त परिवार की आवाज को बुलंद करेंगे. जिन लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है, उनमें से दो नाबालिग हैं. जो शौच के लिए खेतों में गईं थी- वहीं से गांव के दबंगों ने दबोचकर कार में डाला और अनजान जगह ले जाकर कई दिन तक बलात्कार कर भटिंडा छोड़ दिया, अपने हाल पर. परिवार वाले रोते-बिलखते दबंगों के घर गए, थाने गए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं. काफी कोशिशों के बाद गांव के सरपंच ने बताया कि लड़कियां भटिंडा के रेलवे स्टेशन पर हैं.
तारीफ पीडि़त लड़कियों के परिजनों की, मुंह छिपाने की बजाय इंसाफ के लिए लड़कियों के साथ खड़े हुए. दलित जाग रहे हैं, इसका यह अच्छा उदाहरण है. वरना एक समय था, लड़की के साथ बलात्कार हुआ और परिवार के लोग चुप्पी साध कर बैठ गए, किसी को पता न चल जाए. लड़की को भी चुप रहने की हिदायत दे दी जाती थी.
प्राप्त जानकारी के अनुसार इन चार लड़कियों को गांव के ही दबंगों ने 23 मार्च 2014 को उठाकर कार में डाला. 12 लड़कों ने दलितों को सजा देने के लिए इन लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार किया. सोची-समझी रणनीति के तहत गांव के दलित दबंगों से मुंह जोरी करने लगे हैं. दो साल पहले इसी गांव के दलितों की एक विशेष जाति का बहिष्कार किया हुआ है, यह नहीं गए. मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेंगे- उनकी चार लड़कियों के साथ बलात्कार किया, बता भी दिया कि तुम्हारी लड़कियों के साथ बलात्कार करके हमने फलां जगह छोड़ दिया है. अब तुम कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगे. लड़कियां मां-बाप की इज्जत मानी जाती हैं. बलात्कार लड़की के साथ होता है, इज्जत मां-बाप, रिश्तेदारों की जाती है. इसलिए बहुत बार मां-बाप, भाई का बदला लड़की की इज्जत आबरू लूटकर लिया जाता है, यह पुराना दस्तूर अब तक जारी है.
हमें इस बारे में सोचना ही पड़ेगा कि लड़कियों को बताएं कि बलात्कार होना कोई जिंदगी का अंत नहीं है, उसके बाद भी जिंदगी है.  जो बल के बूते किसी स्त्री से संबंध स्थापित करते हैं उनको सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. जल्द से जल्द मिलनी चाहिए. महिलाओं के साथ ज्यादातर बलात्कार बदला लेने के लिए किए जाते हैं. ताकि महिला और उसका परिवार किसी को मुंह दिखाने लायक न रहे. ध्यान रखें  कि जब बलात्कार की शिकार लड़की इज्जत से जीयेगी, मुंह छुपाकर न रहकर बलात्कारी को सजा दिलवाएगी, तो बलात्कार कम होंगे.
किसी भी महिला के साथ बलात्कार उसके जीवन भर के लिए मानसिक पीड़ा का शिकार बना जाता है. यही नहीं, उसके सामाजिक, पारिवारिक सम्मान को ठेस भी पहुंचाता है. फिर भी महिला को इस तरह का प्रशिक्षण, मानसिक मजबूती दी जाए कि बलात्कार भी एक तरह की दुर्घटना ही है- आप इसे गंभीर दुर्घटना कह सकते हैं. लेकिन फिर भी  इस गंभीर दुर्घटना से बाहर निकलना तो है ही. बलात्कार के बाद भी सामान्य जीवन बिताया जा सकता है, इस तरह का सामाजिक माहौल प्रदान किया जाए तो कितना अच्छा रहे. इससे बलात्कारों में भी कमी आएगी. ऊपर भी कहा चुका है कि ज्यादातर बलात्कार महिला या उसके परिवार के लोगों से बदला लेने के उद्देश्य से किये जाते हैं. खेरलांजी, भगाणा आदि बलात्कार इसके उदाहरण हैं. बलात्कार करने वालों को सख्त सजा, सुनवाई फास्ट ट्रेक के जरिये हो, बलात्कार की शिकार महिलाओं का पुनर्वास किया जाए तो बलात्कार में कमी लाई जा सकती है. बलात्कार की शिकार महिलाओं का पुनर्वास इसलिए जरूरी है कि बलात्कार होते ही महिला को देखने का तरीका, नज़रिया एकदम बदल जाता है. उसके परिवार के लोगों को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता, भारत में हालात यह है कि कोई स्त्राी अपनी इच्छा से किसी के साथ सैक्स करती भी है तो उसको ठीक ढंग से नहीं देखा जाता. बलात्कार की शिकार महिला तो सामान्य जिंदगी जी ही नहीं पाती.

बलात्कार, आंदोलन और जाति
हिसार जिले के गांव भगाणा की  चार नाबालिग लड़कियां दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठी हैं, अपने परिवार, रिश्तेदारों के साथ. जुनून उनका अपहरण कर उनके साथ 12 लड़कों ने सामूहिक बलात्कार किया, पकड़े क्यों गए केवल 5 लड़के. बलात्कार की शिकार लड़कियां व उनका परिवार गांव में नहीं रह सकता, क्योंकि जिन लड़कों ने बलात्कार किया वह तथा उनके परिवार के लोग उन्हें खराब नजरों से ही नहीं देखते, बल्कि खुद को उनके परिवार का दामाद, खसम बोलते हैं. लड़कियों को इंसाफ दिलवाने के लिए उनके साथ कुछ आंदोलनकारी संगठन, जेएनयू के छात्रा आए हैं.
एक दिन की बात है. कुछ संगठन बलात्कार के विरोध में जंतरमंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. मैं भी वहीं खड़ा था, कईयों ने सवाल किया, यह लड़कियां कौन सी बिरादरी की हैं. मैंने कहा दलित हैं. पलटकर सवाल किया, नहीं इनकी भी कोई ‘जात’ होगी, वाल्मीकि हैं? खटीक हैं, चमार हैं या कोई और? मैंने कहा, मुझे केवल इतना पता है कि यह दलित हैं. वह व्यक्ति अपने सवाल को दूसरे लोगों से दोहराने लगे.
यानी जाति का समीकरण देखिए कि कुछ लोग उनके आंदोलन से इसलिए दूर हो जाएंगे कि यह लड़कियां दलित तो हैं, लेकिन उनकी जाति की नहीं है.
यदि बलात्कार की शिकार गैरदलित हुई तो हर कोई आंदोलन में कूद पड़ेगा, चाहे किसी भी जाति, धर्म का हो. लेकिन दलित जाति की लड़कियों को इंसाफ दलित जातियों के अपने-अपने खेमे में बटे होने के कारण नहीं मिल पाता.
जंतर मंतर पर अनेक लोग आते हैं, वहां बैठते हैं, लेकिन उनकी निगाहें यही ढूंढ रही होती हैं, आखिर वह लड़कियां हैं कौन सी जो बलात्कार की शिकार हुई हैं. कई लोग सवाल भी कर देते हैं. टैंट में काफी महिलाएं हैं, जो घूंघट में रहती हैं, इनमें से कौन सी वह लड़कियां हैं, जिनके साथ बलात्कार हुआ है? यह सवाल लगातार लोगों के जहन में घूमता रहता हैं. लड़कियां गांव की है, पब्लिक में खुलकर नहीं बोल सकती है- हमारे साथ बलात्कार हुआ है. न उनके मां-बाप, रिश्तेदार चाहते हैं कि वे कहें- हमारी इन लड़कियों के साथ बलात्कार हुआ है. सामाजिक तानाबाना कुछ इस तरह का, बलात्कार स्त्री के साथ होता है, लेकिन उसकी जिंदगी को बर्बाद करने के साथ उसके परिवार के लोगों की जिंदगी को तबाह कर देता है. मानसम्मान गया, लड़की जूठन भी हो गई, कोई उससे शादी नहीं करेगा. मर्द चाहे कहीं भी मुंह मारता फिरे, लेकिन दूसरे की जोरजबरदस्ती का शिकार हुई लड़की को भी वह नहीं अपनाएंगे. किसी ने अपना भी लिया, जिसकी संभावना कम है- तो जीवनभर बात-बात पर ताने मारेगा, ‘एहसान मान मैंने तुझसे शादी की, वरना तू जीवन भर ऐसी ही रहती’

बलात्कार का समाजशास्त्र

लड़की द्वारा लड़के के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा देने पर, लड़की को सजा देने के लिए लड़का उसके साथ बलात्कार कर दे अथवा करवा दे तो लड़की जिन्दगीभर उससे उबर नहीं पाएगी. किसी भाई, पिता ने किसी का अपमान कर दिया, उनसे किसी दुश्मनी का बदला लेना है अथवा उसका घमंड चूर-चूर करना है तो उसकी बहन, बेटी के साथ बलात्कार कर दो, जिन्दगीभर किसी से मुंह उठाकर बात नहीं कर पाएंगे. किसी पुरुष से बदला उसकी बहन, बेटी, पत्नी से लिया जाता है. और हमारे देश की कानून व्यवस्था देखिए बलात्कार की सजा गुनाहगार से ज्यादा लड़की और उसके मां-बाप भुगत रहे होते हैं. बहुत बार लड़कों को जमानत मिल जाती है. उसे सजा तभी मिलेगी,  जब लड़की और परिवार के लोग जीजान लगाकर सजा दिलवाने के लिए भागदौड़ करेंगे वो भी वर्षों. ढेर सारा पैसा लगेगा वो अलग- संभव है घर मकान बेचकर मुकदमा लड़ना पड़े. वरना दोषी जेल की सलाखों से बाहर खुला घूमता नजर आएगा, बिना किसी डर-भय के. लड़की और उसके परिवार को इज्जत-आबरू के साथ रहने का स्थान तो बदलना ही पड़ेगा.
बलात्कारी को बिना सबूतों के सजा नहीं होगी. सबूत तो इकट्ठे करने में पीडि़त मेहनत करेगा. पहली बात तो बलात्कार की शिकार लड़की या उसके परिजन पुलिस पर दबाव नहीं बनाएंगे तो मामला दर्ज हो ही नहीं सकता. हां, पुलिस बलात्कारी, उसके परिवार से मोटी रकम जरूर डकार जाती है. केस दर्ज कर भी दिया तो बलात्कारी पक्ष से मोटी रकम खाकर केस को इतना कमजोर कर देती है कि सजा होना मुश्किल हो जाता है. बलात्कार तभी माना जाएगा, जब मेडिकल में माना जाएगा. यदि पुलिस या डाक्टर की मेहरबानी से मेडिकल जांच में बलात्कार साबित नहीं हुआ तो केस तो बंद होना ही है. इस तरह न जाने कितने केस आए गए हो जाते हैं. कुछ इज्जत, बदनामी के डर से पुलिस तक जाते ही नहीं. चले भी गए तो पुलिस तो पहले यही समझाती है कि इस पचड़े में मत पड़ो. अपनी इज्जत आबरू की सोचो. हां, दोषी से पैसा जरूर खा लेगी. यदि पीडि़ता व उसका परिवार नहीं माना तो उसे भी कुछ पैसे का लालच दिया जाएगा.

राजनीति के नशे में बाबा
बाबारामदेव योगा सिखाते-सिखाते दवाई बेचने लगे, अब राजनीति में उतर आए हैं. बहुत बार वह अपनी जुबान पर काबू नहीं रख पाते, जो मन में आता हैं, बाहर निकाल देते हैं. उसी तरह जैसे शराबी  नशे में कुछ भी बक देता है, मन की भड़ास भी निकाल देता है. राजनीति के नशे में रामदेव के मुंह से दलितों के लिए अभद्र टिप्पणी निकली कि राहुल गांधी दलितों के घरों में हनीमून मनाने जाते हैं. दलितों ने भी पूरे देश में उनकी टिप्पणी का विरोध किया. उन्हें इस टिप्पणी के लिए कुछ मुकदमों का भी सामना करना पड़ेगा. हालांकि बाबा रामदेव ओबीसी हैं, लेकिन राजनीति के नशे में भूल गये, वे क्या हैं. अब उन्होंने धन भी इकट्ठा कर लिया. अब उसे बचाए रखने और बढ़ाने की जुगत में लगे हुए है. पूरे देश में दलितों ने जिस तरह से बाबा रामदेव द्वारा दलितों के लिए की गई अभद्र टिप्पणी का विरोध किया, यदि वह आगे भी जारी रहे तो कोई नेता दलितों के लिए कुछ बोलते समय एक बार सोचेगा जरूर. बाबारामदेव की अभद्र टिप्पणी का जितना विरोध किया जाए, कम 

Friday, May 16, 2014

State Wise Parliamentary Constituencies List:

Parliamentary ConstituenciesSeats
Andhra Pradesh42
Arunachal Pradesh2
Assam14
Bihar40
Chhattisgarh11
Goa2
Gujarat26
Haryana10
Himachal Pradesh4
Jammu and Kashmir6
Jharkhand14
Karnataka28
Kerala20
Madhya Pradesh29
Maharashtra48
Manipur2
Meghalaya2
Mizoram1
Nagaland1
Odisha21
Punjab13
Rajasthan25
Sikkim1
Tamil Nadu39
Tripura2
Uttar Pradesh80
Uttarakhand5
West Bengal42
Andaman and Nicobar Islands1
Chandigarh1
Dadra and Nagar Haveli1
Daman and Diu1
NCT of Delhi7
Lakshadweep1
Puducherry1



MP Election Party Wise Vote Counting Results 2014:
PartyWonLeadingTotal
Bharatiya Janata Party98182280
Indian National Congress103747
All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam43337
All India Trinamool Congress102434
Biju Janata Dal02020
Shivsena61218
Telugu Desam01616
Telangana Rashtra Samithi11011
Communist Party of India (Marxist)279
Yuvajana Sramika Rythu Congress Party099
Nationalist Congress Party246
Lok Jan Shakti Party156
Samajwadi Party055
Aam Aadmi Party134
Shiromani Akali Dal134
Independent044
All India United Democratic Front033
Jammu & Kashmir Peoples Democratic Party033
Rashtriya Janata Dal123
Rashtriya Lok Samta Party033
Indian National Lok Dal112
Indian Union Muslim League202
Janata Dal (Secular)112
Janata Dal (United)112
Apna Dal022
Communist Party of India101
All India N.R. Congress011
Jharkhand Mukti Morcha011
Kerala Congress (M)011
Naga Peoples Front011
National Peoples Party011
Pattali Makkal Katchi011
Revolutionary Socialist Party101
Sikkim Democratic Front011
All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen011
Swabhimani Paksha011


The Election Commission of India is providing the live updates on the vote counting with the leading candidates name list, party name, total margin votes and results for all the 543 Parliamentary Constituencies.
TV Channels like Lok Sabha TV, NDTV India, Aaj Tak, India TV, Headlines Today, NDTV 24×7, Times Now, CNN IBN, NewsX, ABP Ananda, News Time, Channel 10, ETV, Suvarna News, TV9, Asianet News, IBN Lokmat, Lotus News, Sun News, Seithigal, Puthiya Thalaimurai TV, Thanthi TV, Sathiyam TV, Sakshi TV will be providing the latest news and reviews on the 16th Lok Sabha of India General Election 2014.


Tuesday, May 13, 2014

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List of Artists by Region

Uttar Pradesh
Allahabad
Village: Lamahi, District: Allahabad
Ram Kailash Yadav
Vill: Nevada Samogar, District: Allahabad
Shyam Lal Begana
Allahabad Cantt
Lallan Singh Gahmari
Nyaya Marg, Allahabad
Smita Agarwal
Mutthi Ganj, District: Allahabad
Shyam Bihari Gaud
Shahar, District: Allahabad
Santosh Kumar
Mohtsim Ganj, District: Allahabad
Ganna Maharaj
Ghazipur
Village & post: Mardah, District: Ghazipur
Babu Nandan Dhobi
      
Lucknow
District: Lucknow
Indra Srivastava
District: Lucknow
Kamla Srivastava
     
Mathura
Village: Bachganv, District: Mathura
Balla Ram Singh
Village:- Aajnauk, Barsana, District: Mathura
Artists from the
Villae Aajnauk
     
Mirzapur
Belsaliganj, District: Mirzapur
Urmila Srivastava
Kotwali Road, District: Mirzapur
Mohan Lal Kanskar
     
Varanasi 
Vasant Kunj, Delhi
Meenakshi Prasad
Raghubir Nagar, Maldahiya, District: Varanasi
Manoj Tiwari 'Mridul'
Gopal Bagh, District: Varanasi
Manna Lal
Gandhi Nagar Sigra, District: Varanasi
Sucharita Gupta
Gopal Bagh, District: Varanasi
Jawahar Lal
Vill & Po - Danghat, , District: Mirzapur
Maya Devi Dwivedi
Ardali Bazar, Tegor Colony, District: Varanasi
Santosh Srivastava
 
Uttaranchal
Almora
Village: Dhoul Chinna, District: Almora
Anandi Devi & Sant Ram
Village: Kota Lagholi, District: Almora
Harda 'Surdas'
Village: Kanari Chhinna, District: Almora
Lal Singh
Village: Khakhri, District: Almora
Pratap Singh Rawal
& Party
Village: Jagehwar, District: Almora
Ram Chandra Bhatt & Party
  
Dehradun
Premnagar, Dehradun
Basanti Bisht
      
Haldwani
Village: Bindu Khatta, District: Haldwani
Radha
Village: Bindu Khatta, District: Haldwani
Mangal Singh
     
Nainital
Ashram Road, District: Nainital
Sherda 'Anpadh'
      
Pithoragarh
Village: Dunga toli, District: Pithoragarh
Jhusia Damai
Village: Kotli, District: Pithoragarh
Umed Ram
Village : Naini Saini, District: Pithoragarh
Chanchal S Rawat
Village: Charma, District: Pithoragarh
Sher Ram
   
 
Rajasthan
Langa Basti, Masuriya Jodhpur
Ismail Khan Langa & Party
Rama Kanjar Caloni, District- Bara
Chakri Dance
Rajasthan
Rajasthani Mela
Ajmer
Brij Narain Mathur
    
 
Jharkhand
P.O : Sindri, Dist : Dhanbad
Shiva Nand Jha
      
 
Punjab
Danish Manda, District- Jalandar
Swarn Noora
Danish Manda, District- Jalandar
Master Dilbahar
Vill & Po- Manikpur Sharif, District- Ropar
Sardar Harpal Singh Pala
Vill- Lachkani, District- Patiala
Deshraj Lachkani
Tehsil- Baba Bakala, District- Amritsar
Joga Singh Jogi
Vill- Jujarnagar Tandiya, District- Ropar
Mehar Chand Mastana
Baba Deep Singh Nagar, District- Ludhiana
Sohan Nath "Sapera"
Gilvadi Gate, District- Amritsar
Rajkumar "Dholi"
Vill- Jujarnagar Tandiya, District- Ropar
Mundri Lal
     
 
Madhya Pradesh
Vill - Luniyakhedi, District- Ujjain
Prahlad Singh Tipaniya & Ashok Tipaniya
Vill & Po - Kanheriya, District- Dewas
Kaluram Bamnia
Dr. Ambedkar Nagar, Indore
Ramavtar Akhand
Vill - Bajarang Pura, District- Mhow, Indore
Bheru Singh Chouhan, Nanuram Sanweriya
Vill & Po - Suvasa, District- UjjainSundar Lal MalviAnees Vihar, District- UjjainArchana ParmarVill- Ranayal Gadri, District- DewasDayaram Saroliya
District- UjjainHeera Singh BorliyaShantipura, District- DewasHansraj MalwiMahakaal Sindhi Colony, District- UjjainMalwa Sangeet Kala KendraVill & Po - Ghunsi, District- Shajapur Ramprasad AtadiyaVill & Po - Dhakachiya, District- IndoreSingers From Dhakachiya VillageVill & Po - Ghunsi, District- ShajapurWomen Singers From Ghunsi Village 
 
Himachal Pradesh
 
Gujarat
Edgemont, PA 19028, USA
Maitrayee Patel
Vill & Po - Jaitpur, District- Ahmedabad
Ganesh Jogi & Teju Behan
     
 
Delhi 
Panchsheel Enclave, Delhi
Vidya Shah
Preet Vihar, Delhi
Rashmi Agarwal
Anand Lok, New Delhi
Asha Jain
Sarita Vihar, New Delhi
Dr. Neera Mathur
   
 
Bihar
P.O- Nagpura, Dist- Buxar
Ram Raksha Mishra Vimal
      
 
Bengal