Wednesday, April 9, 2014

Rajtarangini and Meghs - राजतरंगिनी और मेघ

सम्राट मेघवाहन से संबंधित हैंजो एक बौध राजा थेऔर इन विचारों से जूझ रहा हूँ.

1. लेखक एक ब्राह्मण थापता नहीं उसके लिखे इतिहास पर कितना विश्वास किया जा सकता है.

2, पुस्तक की भाषा बताती है कि लेखन में काफी भावुकता है और कि वह सत्य पर हावी हो सकती हैतब कितना भरोसा किया जाए.

3. ख़ैरपुस्तक बताती है कि बौध राजा मेघवाहन को गांधार से बुला कर कश्मीर का राजा बनाया गया जिसने अपने सुशासन से प्रजा का हृदय जीत लिया.

4. बाकी बातों को छोड़ यदि केवल मेघवाहन शब्द पर ही विचार किया जाए तो पहला प्रश्न यह है कि क्या हम'मेघवाहनसे ही 'मेघजाति की व्युत्पत्ति (शुरुआतमान लेंऐसा नहीं लगता.

5. भाषा विज्ञान की दृष्टि से 'मेघवाहनशब्द से कई शब्द निकले हो सकते हैंजैसेमेदमघ, मेघमेधमेथा,मेधोमेगलमेगलामींघमेघवालमेंगमेंघवालमेघोवाल, मद्र, मल्ल आदिअधिक संभावना मींघमेंघवाल,मेघवाल की हैये सभी शब्द दलित समुदायों से संबंधित हैं और इतिहास के अनुसार दलित उन्हें ही बनाया गया जिन का मूल बौधधर्म में थासंभावना इस बात की भी लगती है कि सम्राट मेघवाहन मेघ/मेघवाल रहे हों जो अफ़गानिस्तान में बसे थेइतिहास में उल्लिखित 'Dark ages' में 'मेघनाम (वंशावली नामवाले कई राजा हुए हैं लेकिन उनके बाद उन राजाओं के नाम को सरनेम की तरह अपनाने वाले समुदायों का उल्लेख कहीं नहीं मिलताहाँअलबत्ता 'मेघनाम वाले मानव समूहों की संख्या काफी बड़ी है और वे सदियों से गुमनामी में हैं.

6. दूसरी ओर यह भी तथ्य है कि दुनिया में कोई ऐसा मानव समूह नहीं है जिसका अपना कोई पूर्वज राजा या शासक न रहा होयानि तर्क को सिर के बल खड़ा करके देखें तो भी मेघों के समूह का कोई तो राजा रहा होगा.

7. 'मेघशब्द के कई अर्थ हो सकते हैंइस पर भी चर्चा हो सकती हैबुद्ध का एक नाम 'मेघेंद्रहै जिसका अर्थ हैमेघों का राजा.

No comments: